हमें और जीने की चाहत न होती
हमें और जीने
की चाहत न होती
अगर तुम न
होते, अगर तुम न होते
(हमें जो तुम्हारा इशारा न मिलता
भंवर में ही
रहते किनारा न मिलता \- २)
किनारे पे भी
तो लहर आ डुबोती
अगर तुम न
होते, अगर तुम न होते
तुम्हें देखके तो लगता है ऐसे, बहारों
का मौसम आया हो जैसे-2
दिखाई न देती
अंधेरों में ज्योती
अगर तुम न
होते, अगर तुम न होते
तुम्हें
क्या बताऊं के तुम
मेरे क्या हो
मेरी ज़िंदगी
का तुम ही आसरा हो
मैं आशा कि
लड़ियां, न रह रह पिरोती
अगर तुम न
होते, अगर तुम न होते
हर इक ग़म तुम्हारा सहेंगे खुशी से
करेंगे न
शिकवा कभी भी किसी से
जहाँ मुझ पे
हंसता, खुशी मुझपे रोती
अगर तुम न
होते, अगर तुम न होते
न जाने जो दिल से ये आवाज़ आई
मिलन से है
बढ़के तुम्हारी जुदाई
ये आँखों के
आँसू, न कहलाते मोती
अगर तुम न
होते, अगर तुम न होते
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