गोरी गोरी गाँव की गोरी रे
किशोर: गोरी
गोरी गाँव की गोरी रे
किस लिये बुन रही डोरी रे
लता: ओ पिया, डोरी
से बाँध ले गोरी रे
भागे जो करिके तू चोरी रे
ऐ जिया
किशोर: गोरी
गोरी गाँव की गोरी रे
कच्चे हैं तेरे ये रेशम के धागे
टूट जाये जो कोई तोड़के भागे
लता: जब से सै.य्या, तोसे
नेहा लागे
पीछे पीछे मैं हूँ, तू
आगे आगे
खिंचे चले आओगे, जाओगे
जहाँ
जाके देखो तो बरजोरी रे
ओ पिया
किशोर: गोरी
गोरी गाँव की गोरी रे
मैं तो उड़ जाऊँगा इक पंछी जैसे
मुझे तू बन्दी बना लेगी कैसे
लता: तुझे मैं बन्दी बना लूँगी कैसे
सैय्यन, बैंया में
बैंया डाल के ऐसे
तोरे होंठों से लग जाऊँगी मैं
बनके बाँसुरिया तोरी रे
ओ पिया
किशोर: गोरी
गोरी गाँव की गोरी रे
मैं हूँ परदेसी
मैं हूँ परदेसी, सुनले
फिर ना कहना
चला जाना है, यहाँ
नहीं रहना
लता: तेरा रस्ता देखेंगे मेरे नैना
यूँ ही दिन बीतेगा, बीतेगी
रैना
चहे छुप जा तू घटाओं में चंदा
ढूँढ लेगी ये चकोरी रे
ओ पिया
किशोर: गोरी
गोरी गाँव की गोरी रे
किस लिये बुन रही डोरी रे
लता: ओ पिया, डोरी
से बाँध ले गोरी रे
भागे जो करिके तू चोरी रे
ऐ जिया
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