चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये

आनंद बाबू : रो मत पुश्पा, आज तुम जो हो जिस जगह हो,
तुम्हारे आँख के पानी saline water, I mean नमकीन
पानी के अलावा कुछ नहीं है\. इसलिये इन्हें पोंछ डालो
पुश्पा, I hate tears.
पुश्पा : हाँ आनंद बाबू आप ठीक कहते हैं.  बैठिये.
आनंद बाबू : छोड़ो पुश्पा, चलो आज कहीं बाहर चलते हैं.
ढूँढें कोई ऐसी जगह जहाँ थोड़ी देर के लिये ही
सही कुछ याद न आये, न तुम्हें न मुझे.

चिंगारी कोई भड़केतो सावन उसे बुझाये
सावन जो अगन लगायेउसे कौन बुझाये,
ओ... उसे कौन बुझाये

पतझड़ जो बाग उजाड़ेवो बाग बहार खिलाये
जो बाग बहार में उजड़ेउसे कौन खिलाये
ओ... उसे कौन खिलाये

हमसे मत पूछो कैसेमंदिर टूटा सपनों का -2
लोगों की बात नहीं हैये किस्सा है अपनों का
कोई दुश्मन ठेस लगायेतो मीत जिया बहलाये
मन मीत जो घाव लगायेउसे कौन मिटाये

जाने क्या हो जाताजाने हम क्या कर जाते -2
पीते हैं तो ज़िन्दा हैंन पीते तो मर जाते
दुनिया जो प्यासा रखेतो मदिरा प्यास बुझाये
मदिरा जो प्यास लगायेउसे कौन बुझाये
ओ... उसे कौन बुझाये

माना तूफ़ाँ के आगेनहीं चलता ज़ोर किसीका -2
मौजों का दोष नहीं हैये दोष है और किसी का
मजधार में नैया डोलेतो माझी पार लगाये
माझी जो नाव डुबोयेउसे कौन बचाये
ओ... उसे कौन बचाये
चिंगारी ...



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