माना जनाब ने पुकारा नहीं
(माना जनाब ने पुकारा नहीं
क्या मेरा
साथ भी गवारा नहीं
मुफ़्त में बन
के, चल दिये तनके,
वल्ला जवाब
तुम्हारा नहीं ) \- २
माना जनाब ने
...
(यारों का चलन है गुलामी
देतें हैं
हसीनों को सलामी ) \- २
गुस्सा ना
कीजिये जाने भी दीजिये
बन्दगी तो
बन्दगी तो लीजिये साहब
माना जनाब ने
...
(टूटा फूटा दिल ये हमारा,
जैसा भी है
अब है तुम्हारा ) \- २
इधर देखिये, नज़र
फेरिये
दिल्लगी ना
दिल्लगी ना कीजिये साहब
माना जनाब ने
...
(माशा अल्ला कहना तो माना
बन गया बिगड़ा
ज़माना ) \- २
तुमको हँसा
दिया, प्यार सिखा दिया \- २
शुक्रिया तो
शुक्रिया तो कीजिये साहब
माना जनाब ने
पुकारा नहीं,
क्या मेरा
साथ भी गवारा नहीं
मुफ़्त में बन
के, चल दिये तनके,
वल्ला जवाब
तुम्हारा नहीं हाय \- ३
Comments
Post a Comment