जब चाहा यारा तुमने, आँखों से मारा तुमने
जब चाहा यारा
तुमने, आँखों से मारा तुमने
होंठों से
ज़िन्दा कर दिया
अरे तुम्हारी
मर्ज़ी पे चल रहें हैं, ख़ता हमारी क्या
हो जब चाहा
यारा तुमने ...
(चलो जी हम बुरे सही, चलो
जी हम झूठे हैं
मग़र इनहीं निगाहों से हज़ारों दिल टूटे हैं) -२
अरे, कसम
से कहना, हमारी सूरत नहीं है प्यारी क्या
हो..., जब
चाहा यारा तुमने...
(समझ सको तो हमसफ़र, हमें
तुम अपना जानो
अरे,
उधर नहीं इधर चलो, कभी
तो कहना मानो) -२
अरे, लिपट
आके पूछें, के आगे मर्ज़ी अब है हमारी क्या
हो..., जब
चाहा यारा तुमने...
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