रात कली इक ख्वाब में आई और गले का हज हुई

रात कली इक ख्वाब में आई और गले का हज हुई -2
सुबहो को जब हम नींद से जागे आँख तुम्ही से चार हुई
रात कली इक ख्वाब.............................................
चाहे कहो इसे मेरी मुहब्बत, चाहे हंसी में उड़ा दो, ये क्या हुआ मुझे, मुझको खबर नहीं, हो सके तुम्ही बता दो-२
तुमने कदम तो रखा जमीं पर सिने में क्यूँ झनकार हुई
रात कली इक ख्वाब.............................................
आँखों में काजल और लटों में, काली घटा का बसेरा, सांवली सूरत मोहनी मूरत, सावन रुत का सवेरा-२
जबसे ये मुखड़ा दिल में खिला है दुनिया मेरी गुलजार हुई
रात कली इक ख्वाब.............................................
यूं तो हसीनो के, माह्जबिनो के, होते हैं रोज नज़ारे, पर उन्हें देखके, देखा है जब तुम्हे, तुम लगे और भी प्यारे-२
बाँहों में ले लूं ऐसी तमन्ना एक नही कई बार हुई
रात कली इक ख्वाब में आई और गले का हज हुई, सुबहो को जब हम नींद से जागे आँख तुम्ही से चार हुई
रात कली इक ख्वाब.............................................

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