चाँद चुरा के लाया हूँ

चाँद चुरा के लाया हूँ
चल बैठें चर्च के पीछे
ना कोई देखे, ना पहचाने
बैठें पेड़ के नीचे
चाँद चुरा के लाया हूँ...

कल बापू जाग गये थे
मेरी लाज की सोचो
अरे जो होना था कल हुआ था
आज तो आज की सोचो
जाग गये तो? जागने दो ना!
अच्छा? हाँ
तो फिर चल बैठें...

चल दरिया पर कश्ती लेकर
दूर कहीं बह जाएँ
अरे ढूँढ न पाएं बस्ती वाले
साहिल से कह जाएँ
बोल दिया तो? बोलने दो ना!
अच्छा? हाँ
तो फिर चल बैठे...


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