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Showing posts from 2016

के पग घुँघरू बाँध मीरा नाची थी

बुज़ुर्गों ने , बुज़ुर्गों ने , फ़रमाया के पैरों पे अपने खड़े होके दिखलाओ फिर ये ज़माना तुम्हारा है , ज़माने के सुर ताल के साथ , बढ़ते चले जाओ फिर हर तराना तुम्हारा , फ़साना तुम्हारा है अरे तो लो भैया हम , अपने पैरों के ऊपर , खड़े हो गए , और मिलाली है ताल दबा लेगा दाँतों तले उँगलियाँ ... लियाँ ... ये जहाँ देख कर , देख कर अपनी चाल... वाह वाह! धन्यवाद! के पग घुँघरू ... के पग घुँघरू बाँध , मीरा नाची थी और हम नाचे बिन घुँगरू के के पग घुँगरू बाँध , मीरा नाची थी वो तीर भला , किस काम का है जो तीर निशाने से चूके चूके चूके रे के पग घुँघरू ... स स स ग ग री री स नी नी स स स (३) ग ग ग    प प    म म    ग री री    ग ग ग (२) प नी स (४). म प नी (४) रे रे रे रे    रे ग    रे ग    रे ग (Kishore stops) प प प प प म ग रे स नी स ध स नी स ध स नी स ध स नी स ध स नी स ध स ध नी स स ध नी स स ध नी स स ध नी स प म प म ग म ग रे ग रे स नी स नी स ग स रे स ग रे ग रे म रे म ग म ग म प म ...

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

लता: लिखा है तेरी आँखों में , किसका अफ़साना - २ किशोर: अगर इसे समझ सको , मुझे भी समझाना लिखा है तेरी आँखों में , किसका अफ़साना ... लता: जवाब था किसी तमन्ना का , लिखा तो है मगर अधूरा सा अरे ओ ओ ओ ओ   जवाब था किसी तमन्ना का ,  लिखा तो है मगर अधूरा सा किशोर: कैसी न हो मेरी हर बात अधूरी , अभी हूँ आधा दिवाना लता: लिखा है तेरी आँखों में , किसका अफ़साना किशोर: अगर इसे समझ सको , मुझे भी समझाना लता: लिखा है तेरी आँखों में , किसका अफ़साना लता: जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ , ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ   अरे ओ ओ ओ ओ   जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ , ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ   किशोर: थोड़ा सा हसीनों का सहारा लेके चलना , है मेरी आदत रोज़ाना लता: लिखा है तेरी आँखों में , किसका अफ़साना किशोर: अगर इसे समझ सको , मुझे भी समझाना लता: लिखा है तेरी आँखों में , किसका अफ़साना किशोर: यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा , अभी तलक़ ये दिल है बेचारा अरे ओ ओ ओ ओ   यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा ,  अभी तलक़ ये दिल है बेचारा लता: ओ ओ ... दिल को त...

ओ मेरे दिल के चैन

ओ मेरे दिल के चैन चैन आये मेरे दिल को दुआ कीजिये अपना   ही साया देख के तुम जाने जहां शरमा गए अभी तो ये पहली मंजिल है तुम तो अभी से घबरा गए मेरा क्या होगा सोचो तो ज़रा हाय ऐसे न आहें भरा कीजिये ओ मेरे दिल के चैन.. आपका   अरमां आपका नाम मेरा तराना और नहीं इन झुकती पलकों के सिवा दिल का ठिकाना और नहीं जचता ही नहीं आँखों में कोई दिल तुमको ही चाहे तो क्या कीजिये ओ मेरे दिल के चैन.. यूँ   तो अकेला भी अक्सर गिर के संभल सकता हूँ मैं तुम जो पकड़ लो हाथ मेरा दुनिया बदल सकता हूँ मैं माँगा है तुम्हें दुनिया के लिए अब खुद ही सनम फैसला कीजिये ओ मेरे दिल के चैन..

अरे दीवानों मुझे पहचानों

अरे दीवानों मुझे पहचानों कहाँ से आया मैं हूँ कौन मैं हूँ डॉन... अरे तुमने जो देखा है , सोचा है समझा है जाना है , वो मैं नहीं लोगों की नज़रों ने , मुझको यहाँ जो भी माना है , वो मैं नहीं आवारा बादल को , सौदाई पागाल को , दुनिया में समझा है कौन अरे दीवानों मुझे... अरे यारों का वो यार हूँ यारी में जाँ लुटा दे जो मैं हूँ वही दुश्मन का दुश्मन हूँ वो , दुश्मन के छक्के छुड़ा दे जो मैं हूँ वही तुम जानो ना जानो , मैंने तो जाना है , महफ़िल में कैसा है कौन अरे दीवानों मुझे... अरे मैंने क्या सोचा है , क्या ख़्वाब है मेरी आँखों में , तुम जानो ना मैंने भी बदला है क्या रंग बातों ही बातों में , तुम जानो ना चेहरे पे चेहरा है , परदे पे परदा है , दुनिया में समझा है कौन अरे दीवानों मुझे...

चाँद चुरा के लाया हूँ

चाँद चुरा के लाया हूँ चल बैठें चर्च के पीछे ना कोई देखे , ना पहचाने बैठें पेड़ के नीचे चाँद चुरा के लाया हूँ... कल बापू जाग गये थे मेरी लाज की सोचो अरे जो होना था कल हुआ था आज तो आज की सोचो जाग गये तो ? जागने दो ना! अच्छा ? हाँ तो फिर चल बैठें... चल दरिया पर कश्ती लेकर दूर कहीं बह जाएँ अरे ढूँढ न पाएं बस्ती वाले साहिल से कह जाएँ बोल दिया तो ? बोलने दो ना! अच्छा ? हाँ तो फिर चल बैठे...

रोते हुये आते हैं सब, हँसता हुआ जो जायेगा

रोते हुये आते हैं सब , हँसता हुआ जो जायेगा वो मुकद्दर का सिकंदर , जान-ए-मन कहलायेगा वो सिकंदर क्या था जिसने ज़ुल्म से जीता जहां प्यार से जीते दिलों को , वो झुका दे आसमां जो सितारों पर कहानी प्यार की लिख जायेगा वो मुकद्दर का सिकंदर... ज़िन्दगी तो बेवफा है एक दिन ठुकरायेगी मौत महबूबा है अपने साथ लेकर जायेगी मर के जीने की अदा जो दुनिया को सिखलायेगा वो मुकद्दर का सिकंदर... हमने माना ये ज़माना दर्द की जागिर है हर कदम पे आँसुओं की इक नई ज़ंजीर है साज़-ए-गम पर जो खुशी के गीत गाता जायेगा वो मुकद्दर का सिकंदर...

ॐ शान्ति ॐ, शांति-शांति ॐ

हे , तुमने कभी किसी से प्यार किया ? किया! कभी किसी को दिल दिया ? दिया! मैंने भी दिया! मेरी उमर   के नौजवानों दिल न लगाना ओ दीवानों मैंने प्यार करके चैन खोया , नींद खोयी अरे झूठ तो कहते नहीं हैं कहते नहीं हैं   लोग कोई ऐ , प्यार से बढ़कर नहीं है बढ़कर नहीं है रोग कोई चलता नहीं है दिल दे के यारों इस दिल पे जोर कोई इस रोग का नहीं है इलाज दुनिया में और कोई तो गाओ.. ॐ शान्ति ॐ , शांति-शांति ॐ मैंने किसी को दिल देके कर ली रातें खराब देखो आया नहीं अभी तक उधर से कोई जवाब देखो वो ना कहेंगे तो खुदकशी भी कर जाऊंगा मैं यारों वो हाँ कहेंगे तो भी ख़ुशी से मर जाऊँगा मैं यारों तो गाओ.. ॐ शान्ति ॐ , शांति-शांति ॐ जो छुप गया है पहली नज़र का पहला सलाम लेकर हर एक सांस लेता हूँ अब मैं उसका ही नाम लेकर मेरे हजारों दीवाने अब मैं खुद बन गया दीवाना ये वक़्त तुमपे आ जाए प्यार में तो ये गीत गाना सिंग.. ॐ शान्ति ॐ , शांति-शांति ॐ

चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना

चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना कभी अलविदा ना कहना रोते हँसते बस यूँ ही तुम गुनगुनाते रहना कभी अलविदा ना कहना प्यार करते करते हम तुम कहीं खो जायेंगे इन ही बहारों के आँचल में थक के सो जायेंगे सपनों को फिर भी तुम यूँ ही सजाते रहना बीच राह में दिलबर बिछड़ जायें कहीं हम अगर और सूनी सी लगे तुम्हें जीवन की ये डगर हम लौट आयेंगे तुम यूँ ही बुलाते रहना चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना कभी अलविदा ना कहना रोते हँसते बस यूँ ही तुम गुनगुनाते रहना कभी अलविदा ना कहना

एक मैं और एक तू, दोनों मिले इस तरह

किशोर: एक मैं और एक तू , दोनों मिले इस तरह हो , एक मैं और एक तू , दोनों मिले इस तरह और जो तन मन में हो रहा है ये तो होना ही था क्यूँ नहीं , मिलते हैं यार यार से दे मुझे , प्यार का जवाब प्यार से धड़कनें हुई जवाँ , वक़्त भी है महरबाँ फिर ये कैसी दूरियाँ , बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो आशा:   # ष्ह्ह ष्ह्ह ष्ह्ह्ह्ह! # एक मैं और एक तू , दोनों मिले इस तरह हो , एक मैं और एक तू , दोनों मिले इस तरह और जो तन मन में हो रहा है ये तो होना ही था दूरियाँ , वक़्त आने पे मिटायेंगे एक दिन , इतना पास पास आयेंगे इंतज़ार तब तलक , बेक़रार तब तलक यूँ ही प्यार तब तलक , बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो किशोर: # ष्ह्ह ष्ह्ह्ह ष्ह्ह्ह्ह! # एक मैं और एक तू , दोनों मिले इस तरह हो , एक मैं और एक तू , दोनों मिले इस तरह और जो तन मन में हो रहा है ये तो होना ही था आशा:   दिल्लगी , बन गयी है दिल की लगी किशोर:   हे , ज़िंदगी , नाम है इसी का ज़िंदगी आशा:   हो खेल खेल में सनम , आ गये जहाँ पे हम रोक ले वहीं कदम , बोलो बोलो बोलो बोलो बोलो किशोर:   ...