के पग घुँघरू बाँध मीरा नाची थी
बुज़ुर्गों ने , बुज़ुर्गों ने , फ़रमाया के पैरों पे अपने खड़े होके दिखलाओ फिर ये ज़माना तुम्हारा है , ज़माने के सुर ताल के साथ , बढ़ते चले जाओ फिर हर तराना तुम्हारा , फ़साना तुम्हारा है अरे तो लो भैया हम , अपने पैरों के ऊपर , खड़े हो गए , और मिलाली है ताल दबा लेगा दाँतों तले उँगलियाँ ... लियाँ ... ये जहाँ देख कर , देख कर अपनी चाल... वाह वाह! धन्यवाद! के पग घुँघरू ... के पग घुँघरू बाँध , मीरा नाची थी और हम नाचे बिन घुँगरू के के पग घुँगरू बाँध , मीरा नाची थी वो तीर भला , किस काम का है जो तीर निशाने से चूके चूके चूके रे के पग घुँघरू ... स स स ग ग री री स नी नी स स स (३) ग ग ग प प म म ग री री ग ग ग (२) प नी स (४). म प नी (४) रे रे रे रे रे ग रे ग रे ग (Kishore stops) प प प प प म ग रे स नी स ध स नी स ध स नी स ध स नी स ध स नी स ध स ध नी स स ध नी स स ध नी स स ध नी स प म प म ग म ग रे ग रे स नी स नी स ग स रे स ग रे ग रे म रे म ग म ग म प म ...