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ये लाल रंग कब

ये लाल रंग कब मुझे छोड़ेगा -२, मेरा गम कब तलक मेरा दिल तोड़ेगा किसी का भी लिया नाम तो आई याद तू ही तू-2, ये जो प्याला शराब का बन गया ये लहू हाए ये लाल रंग कब मुझे.......................... पीने की कसम डाल दूँ पियूँगा इस तरह हाँ-२, ये न सोचा तुने यार में जियूँगा किस तरह ये लाल रंग कब मुझे.......................... चला जून कहीं छोडके में तेरा ये शहर-२, न तो यहाँ अमृत मिले पिने को न जहर हाए ये लाल रंग कब मुझे.........................

इक अजनबी हसीना से

अं...................हसीना से यूं मुलाकात हो गई! इक अजनबी हसीना से यूं मुलाकात हो गई, फिर क्या हुआ ये न पुछो कुछ ऐसी बात हो गई  इक अजनबी.................................................... वो अचानक आ गई यूं नजर के सामने जेसे निकल आया घटा से चाँद -२ चेहरे पे जुल्फें बिखरी हुई थी दिन मैं रात हो गई इक अजनबी.................................................. जानेमन जानेजिगर होता मैं शायर अगर कहता गजल तेरी अदाओं पर -२ मैंने ये कहा तो मुझसे खफा वो जाने हयात हो गई इक अजनबी................................................... खूबसूरत बात ये चार पल का साथ ये साडी उम्र मुझको रहेगा याद -२ में अकेला था मगर बन गई वो हमसफ़र वो मेरे साथ हो गई इक अजनबी.................................................

प्यार दीवाना होता है

प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है हर ख़ुशी से हर गम से बेगाना होता है -२ शमा कहे परवाने से परे चला जा, मेरी तरह जल जायेगा यहाँ नहीं आ -२ वो नहीं सुनता उसको जल जाना होता है हर ख़ुशी से................................ प्यार दीवाना होता है...................................हर ख़ुशी से................................ रहे कोई सौ पर्दों में डरे शरम से, नजर अजी लाख चुराए कोई सनम से -२ आ ही जाता है जिसपे दिल आना होता है हर ख़ुशी से................................ प्यार दीवाना होता है.....................................हर ख़ुशी से................................ सुनो किसी शायर ने ये कहा बहुत खूब, मना करे दुनिया लेकिन मेरे महबूब -२ वो छलक जाता है जो पैमाना होता है हर ख़ुशी से........................................... प्यार दीवाना होता है..............................हर ख़ुशी से...........................................

नदिया चले चले रे धरा

नदिया चले चले रे धरा चंदा चले चले रे तारा, तुझको चलना होगा तुझको चलना होगा     जीवन कहीं भी ठहरता नहीं है -२, आंधी से तूफान से डरता नहीं है तू न चलेगा तो चल देंगी रहे -२, मंजिल को तरसेंगे तेरी निगाहें तुझको चलना होगा तुझको चलना होगा पार हुआ वो रहा जो सफर में -२, जो भी रूका घिर गया वो भंवर में नाव तो क्या बह जाये किनारा -२, बड़ी ही तेज समय की है धरा तुझको चलना होगा तुझको चलना होगा नदिया चले चले रे धरा चंदा चले चले रे तारा, तुझको चलना होगा तुझको चलना होगा