मिले जो कड़ी कड़ी एक ज़ंजीर बने
मिले जो कड़ी\-कड़ी
एक ज़ंजीर बने
प्यार के रंग
भरो ज़िन्दा तस्वीर बने
ओ हमसफ़र बन
के चलो तो सुहाना है सफ़र
जो अकेला ही
रहे उसे न मिले डगर
यार के बिन कोई जिए तो क्या जिए
ज़िन्दगी है
मुस्कराने के लिए
जो भी यहाँ
पे साथ कुछ जाता नहीं
हो मिले जो
कड़ी\-कड़ी ...
चाहे
और कुछ न मुझे यार
दे
यार तू जी भर
के मुझे प्यार दे
बड़ी मुश्क़िल
से भला यार मिलता है यहाँ
कोई हमराज़ न
हो तो है सूना ये जहाँ
मिले जो कड़ी\-कड़ी
...
जाने एक दिन ये कैसे हो गया
चलते\-चलते
मैं राहों में खो गया
सुबह का भूला
हुआ शाम को घर लौट आए
उसे भूला न
कहो यही है अपनी राय
मिले जो कड़ी\-कड़ी
...
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